मिरगान तिआर
दिआरी तिआर
पुस-मांग जोन ने आमचो लोकमन खुबे हरिक हुदुम ने दिआरी तिआर के बनाउआत। हुन चो पयला दिने गाय बयला के धोरहीमन गेटा बांदुक बाजा मोहरी धरा घरे घरे जाउआत। हुन तिआर ने आमचो लोकमन गाय बयला,भंयसा भंयसी छेरी मेंडा मेडी के बड़े मजा ले हरिक हुदुम ने धुआ फुचा करुआत। आवरी तेमन के चरतो काजे डंडी क छाड़ुआत। कसनबलले ते गाय बयला, भंयसा भंयसी नी पराओत बलासिंग डंडीक छाड़ुआत।
आवरी लोकमन पने पानी पुना धुआ तियार होउआत। आवरी गाय बयला, भंयसा भंयसी छेरी मेंडा, मेडी के घरे आनतो काजे चरतो गोटामन के सकलासिंग घरे आना बांदा, बुंदी करुआत। आवरी गाय बयला, भंयसा भंयसी छेरी मेंडा, मेडी के खातो काजे खिचड़ी बोबो बनाउआत।
आवरी हुन जमक संगे काय-काय किसम-किसम चो जमक पने बनाउआत। आवरी गाय बयला, भंयसा भंयसी, छेरी मेंडा मेंडी के घर चो बेटी बुआरी, सियान सजन कायमंजा हरीक उदुम ने खुआउआत। आवरी ते लोकमन आपन चो रांदा बाड़ा करलो बिती के अस्तिर ले बसासिंग खाउआत। आवरी फेर तेमन चो कारयकरम दुसरा दिने पने होउआय। हुन कारयकरम के गोरधन बोलुआत।
हुन गोरधन चो कारयकरम अयतवार दिन चो सांज बेरा होउआय। हुनथाने गाय धोरहीमन बाजा मोहरी आवरी देव-धामी के धरा नाचते डोगाते नेउआत। आवरी गोरधन चालु हुआ जाउआय। हुता गोटक जोड़ा बयला के पने आनुआत। कसनबलले गोरधन ने मेरानमन आपन-आपन चो घर ले धान पान के आनुआत आवरी आपन आपन चो धोरही के देउआत। आवरी ते धोरहीमन हुन धान थानले खिंडिक लका धान के ते बयला के खुआउआत। आवरी हुन धान के आपन चो टाकरा ने सोंगाउआत। आवरी हुन दिआरी तिआर आवरी गोरधन सरुआय।
नुआ खाई
नुआ खाई तिआर भादो जोन ने मानुआत। ए तिआर सुकरवार ची दिने होउआय। ए तिआर ने नुआ धान के बेड़ा ले नुआ फटई थाने गुड़ावसिंग आनुआत आवरी एके जुना धान संगे मिसावसिंग नुआ कुंडरी ने भाजुआत। एके कांडासिंग गुर संगे चटकुआत। पाचे चिवड़ा के पने गुर संगे चटकुआत। आवरी सांज बेरा घर चो मांई पिला गोटकी लगे रुंडासिंग एक दुसर के पांय पड़ा पड़ी होउआत आवरी असिरबाद दिया दी होउआत। एचो पाचे घर चो सबु लोक गोटकी लगे बसासिंग कांडलो नुआ धान के आवरी भीजालो चिवड़ा के कुड़ई पान ने धरासिंग टीका मांडुआत आवरी खाउआत। आवरी माहपरु के धनेबाद देउआत। घर चो पिलाझिला सियान सजनमन नुआ नुआ फटई पिंदासिंग बाहरे निकरुआत।
बड़े बड़े सियानमन एक दुसर के तुआल दिया दी होउआत। नानी नानी लेकामन पोरा बयला आवरी लेकमन कोंडी बुची संगे खेलुआत आवरी बड़े बड़े लेकामन घोंड़दी बनाव गांव भीतरे बुलुआत। ए सबु सरलो पाचे घर चो लोक अछा अछा भात साग रांदा खाउआत आवरी एक दुसर चो घरे दिया दी होउआत। बासी तिआर दिने पने सबु लोक कायमंजा बोबो रोटी, कुकड़ा बोकड़ा चो मास के रांदा खाउआत। एचो पाचे तीसरा दिने गांव चो पुजारी घोंड़दी टुटाउक जाउआय।
मंडई
मंडई के मिरगान भासा ने बजार बोलुआत। बजार के आमचो लोक खुबे मन करुआत आवरी खुबे लोक एके जानोत। बजार सुरु होतोर पईले लोकमन आपन-आपन चो देव धामीमन के मंडई भाटा ने आनुआत आवरी हुनके पुजा पाठ करुआत।
ए बजार सबु बड़े गांवमन ने होउआय, बजार थाने आली-पाली चो गांव चो सबु लोक रुंडुआत। ईकाजे मंडई खुबे अछा आवरी हरिक उदुम होउआय। ए बजार ओबगो बिका भांजा काजे नांई मातर नुआ-नुआ लोकमन के भेटघाट बिती तिआर पने आय। लोकमन आपन-आपन चो लोक-बाकमन के आवरी मित-मयतरमन के हागदेउ आत। बजार दिने लोकमन अछा-अछा सागभात रांदुआत आवरी परिवार संगे खाउआत। बजार ने खेलतो बितीमन खाजा, चरबन, पाक-फल चो दुकान रउआय। झुलना पने रउआय, एके नानी-नानी पिलाझिलामन खुबे मन करुआत।