परगाउन्दी आंव
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मिरगान चो इतिहास
छेतर
सबुले अनगर मिरगान भासा ओड़ीसा चो कोरापुट, नवरंगपुर जिला आवरी छत्तीसगढ़ चो बस्तर जिला चो संदी लग चो छेतर ने गोटाउ आत। असन बोलुआत ओड़ीसा चो मिरगान लोक खुबे पईले बस्तर जिला ले इया रला। अबर एमन कोरापुट आवरी नवरंगपुर जिलामन ने आवरी कोटपाड़ ले धरा उमरकोट लगले बसला आत। मातर मिरगान भासा गोटातो खुबे लोक छत्तीसगढ़ चो बस्तर जिला चो बकावंड, जगदलपुर, बस्तर आवरी टोकापाल तहसीलमन ने रउआत।
भासा आवरी लोक
मिरगान नाव जाति आवरी भासा दुनो के बोलुआत। इंचो थर जड़ इंडो-आर्यन लोकमांदा चो आय। मिरगान लोक भारत देस चो गोटक छोटे मा लोकमांदा चो नाव आय। मिरगान लोक के पने पनका लोक बोलुआत। ए लोक सबुले अनगर छतीसगड़ ने आवरी ओड़िसा ने रउआत। मिरगान लोक के सरकार ओड़िसा ने अनुसुचित जाति आवरी छतीसगड़ ने अन्य पिछड़ा वर्ग ने आवरी कोनी कोनी जगा ने सामान्य वर्ग ने पने सोंगाली आय।
लोकमन मिरगान लोक के फटई बिनतो बुता ले जानुआत। तेमन सबुले बड़ेया करिया आवरी लाल रंग चो फटई बनाते रला। ए काम के तेमन मंगटा बोलतो पारंपरिक मसीन ले करते रला आवरी इंचो ए कला दादी पुरखादाय ले चलते इदी आय।
कोटपाड़ चो मिरगान लोक हात ले बनालो रंग चो फटई काजे परसिध आत। एमन रंग के ओल गच चो छाली ले बनाउआत। मातर आजी-काली हाटे-पटने मसीन ले बनालो फटई खुबे चलदी आय। ईकाजे केतलो मिरगान लोकमन फटई बिनतो बुता के छाड़ा दिला आवरी खेती बाड़ी नोअले कुली भुती करुक मुराला आत।
पारंपरिक फटई